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Heart Health

Heart Attack Treatment का फैसला कौन करे?

Just For Hearts2 मिनट का पठन

जब किसी मरीज को Heart Attack होता है, तो इलाज का फैसला अक्सर मरीज या उनके करीबी परिवार के बजाय पड़ोसी, दूर के रिश्तेदार या ऑफिस के दोस्त करते हैं।

यह आज के स्वास्थ्य देखभाल प्रणाली में सबसे खतरनाक प्रवृत्तियों में से एक है।

25 वर्षों और लाखों मरीजों के अनुभव से एक सचाई कभी नहीं बदलती: मरीज महत्वपूर्ण होता है, लेकिन निर्णय लेने वाले गैर-Clinical होते हैं। इससे अक्सर जानलेवा भ्रम पैदा होता है।

थोड़ा सोचें: क्या आपने कभी ऐसी स्थिति में सलाह दी है: - जब आपका मरीज से कोई सीधा संबंध नहीं था? - जब आप रिपोर्ट, ECG या angiogram को समझते नहीं थे? - "रुको," "किसी से पूछते हैं," या "यह-यह कह रहा था" जैसे शब्द कहे?

क्या आपने कभी महसूस किया कि आपकी एक बात angioplasty या इलाज में देरी कर सकती है, clot बनने का खतरा बढ़ा सकती है, और दिल को स्थायी नुकसान पहुंचा सकती है?

कुछ तथ्य, डॉक्टर के नजरिए से स्पष्ट:

1. आपातकाल में, 'Minutes = Muscle'। देरी का मतलब स्थायी दिल का नुकसान है। गलतफहमी सबसे बड़ी देरी का कारण है।

2. फैसला करने का अधिकार मरीज और उनके करीबी परिवार के पास होता है। अन्य केवल राय दे सकते हैं, फैसला नहीं। कभी-कभी ये राय जानलेवा हो सकती हैं।

3. दूसरे विशेषज्ञ डॉक्टर से दूसरी राय लेना अच्छा है, लेकिन आपातकाल में 8-10 लोगों की मुफ्त राय गलत हो सकती है।

4. डॉक्टर दबाव नहीं डालते; वे जोखिम कम करते हैं। मेरे अनुभव में, देरी से इलाज के कारण जान जाने वाले मरीज गलत इलाज से ज्यादा हैं।

5. बड़े संकट में विशेषज्ञों की आवाज सबसे महत्वपूर्ण होती है। अपनी जान YouTube, WhatsApp influencers (विशेषज्ञ डॉक्टरों को छोड़कर), अधूरी जानकारी या दूर के रिश्तेदारों पर मत लगाएं।

क्या आपने कभी ऐसी स्थिति में अनावश्यक सलाह दी है? या आपके परिवार में कई लोगों की सलाह के कारण इलाज में देरी हुई है? कृपया टिप्पणियों में साझा करें; इस विषय पर खुली चर्चा समाज के लिए बहुत जरूरी है।

आदर्श रूप से क्या किया जाना चाहिए: - केवल करीबी परिवार और डॉक्टरों को निर्णय लेने दें। - अगर जरूरत हो तो दूसरी राय लेने में मदद करें। - जान बचाने के लिए भ्रम कम करें और स्पष्टता बढ़ाएं।

डॉ रविंद्र एल. कुलकर्णी, MD, DNB, FSCAI (Cardiology) Just For Hearts

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