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एक बेटी, उसकी माँ, और ICU में एक असहाय हकीकत

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ICU के दौरों के दौरान, कई बातें सुनी जाती हैं, लेकिन कुछ बातें दिल में गहराई से बस जाती हैं...

लगभग 40-45 वर्ष की एक महिला अपनी 75 वर्ष से अधिक उम्र की माँ के लिए दिन-रात ICU में जागती रहती है।

माँ को एक बड़ा Stroke/paralysis का हमला हुआ था। 7-8 दिनों के बाद भी सुधार सीमित है।

खर्चे लगातार बढ़ रहे हैं।

बेटी कहती है, "मैं अपनी माँ के लिए आखिरी दम तक सब कुछ करना चाहती हूँ, डॉक्टर..."

लेकिन घर पर एक आर्थिक हकीकत है।

पति या अन्य परिवार के सदस्य परिणाम पर सवाल उठाते हैं: "ICU में कितने दिन? कितना खर्च होगा?"

उस पल, बिना शब्दों के, उसकी आँखों में जो झलकती है वह बहुत कुछ कह जाती है – माँ पर खर्च करने की इच्छा लेकिन असमर्थता का एहसास आँसुओं से भी गहरा है।

यह केवल एक clinical केस नहीं है, यह माँ के जीवन की एक झलक है, उसकी संघर्षों की कहानी, और अब ICU में उसकी असहाय स्थिति।

बेटी मेरी ओर देखती है। वह जवाब चाहती है, वह उम्मीद चाहती है... लेकिन वह भी सीमित है।

"बेटी के लिए आसान नहीं है। डॉक्टर के लिए भी आसान नहीं है।"

क्या आपने कभी ऐसा अनुभव किया है? क्या आपने अपनी माँ की अंतिम दिनों में देखभाल करते हुए यह असहायता महसूस की है?

डॉ. रविंद्र एल. कुलकर्णी, MD, DNB, FSCAI (Cardiology) Just For Hearts

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