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शेर का सवाल: आधुनिक जीवन पर एक कथा
एक बार जंगल में, शेर ने सभी जानवरों से पूछा… "आपके पास खाना, पानी, सुरक्षा है… फिर भी, आपके चेहरे पर संतोष क्यों नहीं है?"
कुछ देर के लिए चुप्पी छा गई…
एक लोमड़ी ने धीरे से कहा… "हम खाते हैं… लेकिन भूखे न होने पर भी कब रुकना है, भूल गए।"
एक हिरण ने कहा… "हम पूरे दिन दौड़ते हैं… लेकिन हमें पता नहीं कि हमें कहाँ पहुंचना है।"
एक पक्षी ने कहा… "हम सोते हैं… लेकिन हमारा मन कभी शांत नहीं होता।"
शेर चुपचाप खड़ा रहा…
तभी एक बूढ़ा कछुआ आगे आया… और धीरे आवाज़ में बोला,
"हमने सब कुछ पा लिया है… लेकिन जीवन की सरलता खो दी है।"
जंगल में कुछ भी कमी नहीं है… फिर भी, कुछ तो गायब है…
क्योंकि समस्या बाहरी नहीं है यह हमारी आदतों में है… हमारी भागदौड़ में है… और खुद से दूर होने में है…
और फिर शेर ने कहा…
"समस्या खाना में नहीं है… पानी में नहीं है… बल्कि हमारे जीने के तरीके में है।"
आज हमारी स्थिति भी अलग नहीं है…
सब कुछ उपलब्ध है… लेकिन क्या हम अपने शरीर को वह दे रहे हैं जिसकी उसे वास्तव में जरूरत है?
अंत में, सवाल यह नहीं है कि हमने कितना पाया…
सवाल यह है कि हम कैसे जीते हैं…
और उस जीने में, क्या हम खुद को खो नहीं रहे हैं?
डॉ. रविंद्र एल कुलकर्णी Just For Hearts