Just For Hearts

General Health

Branded और Generic Medicines – इतनी Confusion क्यों?

Just For Hearts1 मिनट का पठन

Branded और Generic Medicines – इतनी Confusion क्यों है? आइए कारणों को समझते हैं:

1. डॉक्टर द्वारा prescribed medicine महंगी होती है, लेकिन मेडिकल स्टोर पर पूछने पर कहा जाता है, "यह Generic, सस्ती है," तो संदेह होता है।

2. फार्मासिस्ट अपने आप अलग brand देता है, जिससे सवाल उठते हैं, "क्या switch करना ठीक है? डॉक्टर की prescription न मानने से नुकसान होगा?"

3. इंटरनेट, WhatsApp और YouTube पर लोग कहते हैं – "Generic मतलब वही medicine, Branded सिर्फ पैसे कमाने का तरीका!"

4. एक ही बीमारी के लिए दो मरीज अलग medicines लेते हैं, जिससे लगता है, "क्या मुझे ज्यादा medicine दी जा रही है?"

5. लंबे समय की medicines महंगी लगती हैं, इसलिए मासिक खर्च कम करने के लिए सस्ते विकल्प खोजे जाते हैं।

6. सरकारी अस्पतालों में free medicines मिलती हैं, तो प्राइवेट डॉक्टर अलग medicines क्यों prescribe करते हैं?

7. Pharmaceutical कंपनियां Branded medicines का ज्यादा advertisement और marketing करती हैं, जिससे वे लोकप्रिय होते हैं और Generics अनदेखे रह जाते हैं।

8. डॉक्टर और फार्मासिस्ट के बीच कम संवाद होता है, जिससे मरीजों को भरोसा करने में confusion होती है।

9. मरीज और देखभाल करने वाले pharmacology की जानकारी नहीं रखते, इसलिए समझ नहीं पाते कि "Salt तो वही है" या "Technology अलग है।"

10. डॉक्टरों पर आरोप लगते हैं कि "वे commission के लिए brands prescribe करते हैं," लेकिन उनके clinical अनुभव और भरोसे को नजरअंदाज किया जाता है।

अगले पोस्ट में हम देखेंगे – Generic और Branded medicines में असल में क्या फर्क है? और मरीजों को क्या चुनना चाहिए?

लेकिन उससे पहले… क्या आपको ये सवाल सही लगते हैं? आपका अनुभव क्या कहता है? कृपया comments में लिखें।

डॉ. रविंद्र एल कुलकर्णी Just For Hearts

#generic-medicines#branded-medicines#medicine-confusion#healthcare#patient-awareness#pharmacy#doctor-patient-communication
Share:WhatsAppXFacebook